Thursday, November 15, 2018

साथ बने थे तीन राज्य, झारखंड से आगे निकले छत्तीसगढ़ और उत्तराखंड

वर्ष 2000 में झारखंड, उत्तराखंड और छत्तीसगढ़ का गठन एक साथ हुआ था। आज तीनों ही छोटे राज्य अपने पैरेंट स्टेट के मुकाबले तो तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, परंतु इन तीनों छोटे राज्यों का आपस में तुलनात्मक अध्ययन करने पर स्पष्ट होता है कि सामाजिक-आर्थिक विकास के पैमानों में झारखंड की तरक्की बाकी दोनों राज्यों के मुकाबले काफी धीमी है।

उद्योगों को आकर्षित करने के मामले में छत्तीसगढ़ और उत्तराखंड दोनों ने ही झारखंड से बेहतर प्रदर्शन किया है, हालांकि मध्यम और लघु उद्योगों में झारखंड बेहतर काम कर रहा है। यही नहीं, आम आदमी से जुड़ी बिजली-पेयजल और सड़क जैसी चीजों में भी दोनों राज्यों का प्रदर्शन झारखंड से अच्छा है

तीनों राज्यों में छत्तीसगढ़ का प्रदर्शन बेहतर है। इसका बड़ा कारण यहां राजनीतिक स्थिरता को माना जा सकता है। इसका फायदा सार्वजनिक वितरण प्रणाली में सुधार के रूप में वहां स्पष्ट नजर आता है। नीति और इसके क्रियान्वयन की स्पष्टता के कारण आज गरीबों तक राशन पहुंचाने के मामले में छत्तीसगढ़ पूरे देश के लिए मिसाल बन गया है। हालांकि, राजनीतिक स्थिरता के बावजूद छत्तीसगढ़ अपराधों पर लगाम कसने में नाकाम रहा है।

ओवरऑल उद्योगों की संख्या में बढ़ोतरी के मामले में बाकी दोनों राज्यों का प्रदर्शन झारखंड से बेहतर है। उद्योगों के बढ़ने की गति सबसे तेज उत्तराखंड में है। वहीं उद्योगों को मिलने वाले कर्ज में सबसे तेज बढ़ोतरी छत्तीसगढ़ की है। मध्यम व लघु उद्योगों के मामले में झारखंड का प्रदर्शन बाकी दोनों राज्यों से बेहतर है। उत्तराखंड में इन उद्योगों में निवेश की मात्रा ज्यादा है, मगर ये वहां की भौगोलिक परिस्थितियों के कारण है।

ग्रामीण घरों में शौचालयों की उपलब्धता में झारखंड में अभी करीब 55% ही लक्ष्य हासिल किया जा सका है। स्कूलों व आंगनबाड़ियों में शौचालय निर्माण में भी छत्तीसगढ़ बेहतर है। जबकि झारखंड का प्रदर्शन उत्तराखंड से बेहतर रहा है, मगर आंगनबाड़ियों में शौचालय निर्माण के मामले में हम राष्ट्रीय औसत से भी पीछे हैं।

झारखंड ने सड़कों का नेटवर्क सबसे तेजी से बढ़ाया है। हालांकि इसके बावजूद वाहनों के रजिस्ट्रेशन में छत्तीसगढ़ दोगुने से ज्यादा आगे है। वहीं वाहनों की वृद्धि की दर में उत्तराखंड भी झारखंड से आगे है। इससे ये पता चलता है कि राज्य में सड़कों का नेटवर्क बढ़ने के बावजूद गुणवत्ता खराब है

लिंगानुपात बाकी दोनों राज्यों में झारखंड से बेहतर है, मगर इसमें सुधार की दर के मामले में झारखंड आगे है। शिशु मृत्युदर कम करने के मामले में झारखंड सबसे आगे है, जबकि टीकाकरण के मामले में छत्तीसगढ़ का प्रदर्शन ही हमसे बेहतर है। उत्तराखंड में न सिर्फ सुधार की गति धीमी है, बल्कि बच्चों का टीकाकरण वहां घट गया है।

ग्रामीण विद्युतीकरण में तो बाकी दोनों राज्य झारखंड से आगे हैं, मगर सुधार की दर सबसे तेज झारखंड में ही है। हालांकि घरों तक बिजली पहुंचाने और बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित करने में झारखंड बाकी दोनों राज्यों से काफी पीछे है। यहां बिजली उत्पादन की वृद्धि दर बाकी दोनों राज्यों से बहुत कम है। इस मामले में सबसे अच्छा प्रदर्शन छत्तीसगढ़ का है।